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सोमवार, 30 मई 2022

राजा जैसी होती है इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम के लोगों की जिंदगी

सफलता की कुंजी होती है इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम के लोगों की जिंदगी
   
Occult Science में नाम के प्रथम अक्षर का बहुत महत्त्व है।  कहा जाता है कि व्यक्ति का नाम। पूरे नाम का भी अपना एक गणित होता है और उसका भीवासर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। पर पहिए अक्षर का असर व्यक्ति के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर भी पड़ता है। 

जैसे की 
A जिन लोगों का नाम A (अ) अक्षर होता है ऐसे लोग प्रमाणिक & परिश्रमी होते हैं. ये लोग अपने कार्य  और विचार को लेकर दृढ़ होते हैं। ऐसे लोगों के जीवन में कभी धन-वैभव की कमी नहीं आती। हर असंभव कार्य को संभव करने में विश्वास करते हैं। 


K या Kh क, ख अक्षर से शुरू होने वाले लोग बहुत ही सौभाग्यशाली होते हैं. ये लोग हानेशा खुश रहने वाले और जीवन में धन धान्य से परिपूर्ण जीवन जीने वाले होते हैं। मां लक्ष्मी & कुबेर का आशीर्वाद होता है। 

P या प, फ (Ph) अक्षर से प्रारंभ हो रहे नाम वाले लोग बहुत शांत, आंनदमयी और मिलनसार (Easily Approachble)  स्वभाव के होते हैं। ऐसे लोग अतिशय संस्कारी और दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखते हैं. लोगों का विश्वास जीतना इनके लिए चुटकी का काम है। 

S या स, श अक्षर से जिनके नाम प्रारंभ होते हैं, बोबतो गजब के ईमानदार होते हैं। ये लोग challenging Task लेने और सफलता तक पहुंचाने में विश्वास करते हैं। थोड़ा struggle करके परंतु सफल होकर रहते हैं ये लोग ।

शनिवार, 28 मई 2022

ये रेखाएं भाग्य और संपन्नता की प्रतीक हैं



प्रत्येक व्यक्ति के मन मस्तिष्क में अनेकों सवाल होते हैं परंतु एक सवाल बहुत लोगों में पाया जाता है कि उनका भाग्योदय कब होगा और वह कब संपत्तिवान बनेंगे। कुछ लोग कर्म और परिश्रम के बल पर सफल हो जाते हैं तो कुछ लोग बहुत भाग्यशाली होते हैं।  आपके हाथों में बनी हुई कुछ रेखाएं और चिह्न आपके भाग्य को बताने में मददरूप होते हैं। 

जैसे की यदि हृदय रेखा पर V का चिह्न दिखे तो यह भाग्य का स्वरूप है। 
यह V का निशान व्यक्ति को भविष्य में धनवान, भाग्यवान और सफल होने का परिचायक है। 
हाथ में उंगलियों के नीचे खड़ी रेखाएं व्यक्ति के भाग्यशाली होने के प्रतीक हैं।

शुक्र पर्वत से रेखा निकलकर यदि भाग्यरेखा से मिलती है तो इसे राजयोग माना जाता है। 

हथेली में तीन पत्तियों जैसा निशान कमल का फूल माना जाता है और मां लक्ष्मी का स्वरूप के तौर पर देखा जाता है। 

अगर किसी के हाथ में शुक्र और गुरु पर्वत आकर्षक दिख रहे हों तो इन व्यक्तियों को किस्मत वाला माना गया है।  वैसे भी ये दोनों (गुरु & शुक्र) ही धन, वैभव और अतिशय आनंदमयी जीवन देने के लिए जाने जाते हैं।

सोमवार, 23 मई 2022

मंदिर चाहिए या रोजगार?

मंदिर चाहिये या रोजगार ?

इस प्रश्न में अतिशय दूषित मानसिकता छिपी है। परंतु उत्तर देना आवश्यक है। 

जब आप अपने परिवार के साथ मंदिर जायेंगे। तो आप पूजा से पहले दुकान से प्रसाद लेंगे , चढ़ाने के लिए माला, पूजा के लिए नारियल, प्रसाद भी लेंगे।

जिज्ञासु व्यक्ति के तौर पर यदि आप आसपास दृष्टि डालेंगे तो दुकान , हर ठेलिया को देखने को मिल जाएंगे। 
खाने पीने की दुकानें, चाय की दुकान, चाट, जलेबी, कपड़े, श्रृंगार आदि के सामान बेचने वाले छोटी बड़ी दुकानें देखने को मिल जाएंगी। 

यदि आप ध्यान से देखें तो पाएंगे एक मंदिर दो से ढाई हजार लोगों को जीवन यापन का Source है। 
लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात है। मंदिर किसको रोजगार दे रहा है ! यह वह लोग है ,जिनके पास किसी संस्थान से डिग्री नहीं है। इतना धन नहीं है कि कोई बड़ा निवेश कर सकें। अर्थव्यवस्था में समाज के निचले स्तर के लोग है।
*मंदिर*
*करोड़ो लोगों को रोजगार देते हैं।*
*कैसे...... ????*

१.धार्मिक पुस्तक बेचने वालों को और उन्हें छापने वालों को रोजगार देते हैं।
२. माला बेचने वालों को घंटी-शंख और पूजा का सामान बेचने वालों को रोजगार देते हैं।
३. फूल वालों को माला बनाने और किसानों को रोजगार देते हैं।
४. मूर्तियां-फोटुएं बनाने और बेचने वालों को रोजगार देते हैं।
५. मंदिर प्रसाद बनाने और बेचने वालों को रोजगार देते हैं।
६. कांवड़ बनाने-बेचने वालों को भी रोजगार देते हैं।
७. रिक्शे वाले गरीब लोग जो कि धार्मिक स्थल तक श्रद्धालुओं को पहुंचाते हैं उन रिक्शा और आटो चालकों को रोजगार देते हैं।
८. लाखों  पुजारियों को भी रोजगार देते हैं।
९. रेलवे और हवाई जहाज की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मंदिरों से चलता है।
१०. मंदिरों के किनारे जो गरीबों की छोटी-छोटी दुकानें होती है उन्हें भी रोजगार मिलता है।
११. मंदिरों के कारण अंगूठी-रत्न बेचने वाले गरीबों का परिवार भी चलता है।
१२. मंदिरों के कारण दिया बनाने और कलश बनाने वालों को भी तो रोजगार मिलता है।
१३. मंदिरो से उन हजारों खच्चर वालों को रोजगार मिलता है जो कि श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ों पर प्रभु के द्वार तक ले जाते हैं।
१४. भारत में लाखों होटल हैं और धर्मशालाएं हैं उनमें रहने वाले लोगों को मंदिर ही तो रोजगार देतें हैं।
१५. तिलक बनाने वाले- नारियल और सिंदूर आदि बेचने वालों को भी ये मंदिर रोजगार देते हैं।
१६. गुड-चना बनाने वालों को भी मंदिर रोजगार देते हैं।
१७. मंदिरों के कारण लाखों अपंग और भिखारियों और अनाथ बच्चों को रोजी-रोटी मिलती है।
१८. मंदिरों के कारण लाखों वानरों की रक्षा होती है और सांपों की हत्या होने से बचती है।
१९. मंदिरों के कारण ही हिंदू धर्म में पीपल-बरगद -पिलखन- आदिहै वृक्षों की रक्षा होती है।
२०. मंदिर के कारण जो हजारों मेले हर वर्ष लगते हैं- मेलों में जो चरखा-झूला चलाने वालों को भी तो रोजगार मिलता है।
२१. मंदिरों के कारण लाखों टूरिस्ट मंदिरों में घूमते हैं और छोटे-छोटे चाय-पकौडे-टिक्की बेचने वाले सभी गरीबों का जीवन यापन भी तो चलता है।
सनातन धर्म उन करोड़ों लोगों को रोजगार देता है जो गरीब हैं।
जो ज्यादा पड़े लिखे नहीं हैं और जिन के पास धन-जमीन और खेती नहीं है जो बचपन में अनाथ हो गए।

यह सामाजिक , धार्मिक उन्नयन का केंद्र है।
यदि आर्थिक दृष्टि से देखे तो मंदिर , अपने निवेश से कई हजार गुना रोजगार दे रहा है।
शायद हमनें अपनी धार्मिक आस्था के कारण इसको देखा नहीं। हमारे मंदिर , आर्थिक वितरण के बहुत बड़े , स्थाई केंद्र है।
🚩🚩🚩🚩
आईए Industries को देखते हैं। मंदिर की भौगोलिक क्षेत्रफल के बराबर की factory और Company  कितने लोगों को रोजगार देता है।  जिनको रोजगार मिलता है उनकी मानसिक स्थिति और मंदिर पर निर्भर लोगों की मानसिक स्थिति की भी तुलना करने योग्य है। 
   

रविवार, 22 मई 2022

हथेली से जानें भविष्य

हस्‍तरेखा मतलब हाथ की रेखाएं, आकृतियों, चिह्न, लक्षण, तिल, हाथ की संरचना, रंग आदि के आधार पर व्यक्ति के स्‍वभाव, व्यक्तित्व और भविष्‍य के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है. इससे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, करियर, शिक्षा, परिवार, उसके जीवन में आने वाले दुख-सुख, घटनाओं जैसी अनेकों जानकारियां मिलती हैं. हर एक रेखा के बारे में जानना रोचक होता है, और अधिकत्तर रेखाएं जो नियत दिशा में हों तो उसे हस्‍तरेखा में शुभ माना गया है. इन रेखाओ के अलग अलग नाम है जैसे सूर्य रेखा, भाग्य रेखा, भगवान विष्‍णु रेखा, हृदय रेखा। विशेषतः जिन लोगों के हाथ में भगवान विष्‍णु रेखा होती है, वे बेहद सौभाग्‍यशाली होते हैं ऐसी मान्यता है। 

हथेली में कहां होती है और कैसे ढूंढें इन रेखाओं को जैसे कि विष्‍णु रेखा?

जब हृदय रेखा से एक रेखा निकलकर गुरु पर्वत की तरफ जाए और हृदय रेखा 2 भागों में बंटती हुई दिखे तो उसे विष्णु रेखा कहते हैं, उसे हम सौभाग्यशाली मान सकते हैं।  इन  व्यक्तियों पर भगवान विष्‍णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा रहने की प्रबल संभावना है तथा अच्छे पद, सुख-समृद्धि से भरपूर जीवन यापन करने की संभावना रहती है। समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा भी प्राप्त करते हैं। 


(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.)

मंगलवार, 17 मई 2022

ज्ञानवापी मंदिर का प्रेतछाया से मुक्ति

काशी के अक्षांश और रेखांश पर आज 10:21:55 बजे से 11:12:42 तक उच्च के शुक्र स्वगृही बृहस्पति के साथ धर्मभाव में थे । नौ में से छ ग्रह राक्षस नवांश में हैं,अशुभ काल है । राक्षस उत्पात करेंगे । किन्तु धर्मभाव के स्वामी स्वगृही बृहस्पति का बल कोई नहीं रोक सका ।

वेदव्यास जी ने जिनलोगों को “धर्मदूषक लिङ्गच्छेदी पिशाचधर्मा महामदासुर के अनुयायी” कहा था उनके लिए धर्म के दसों लक्षणों के उलट चलना ही सही है । अधैर्य,क्षमा न करना,मन के दमन में असमर्थ,चोरी,अशौच,इन्द्रियलोलुपता,विवेकहीनता,अविद्या,असत् एवं क्रोध — पिशाचधर्म के ये दस लक्षण हैं । उनके लिए शिवलिङ्ग फव्वारा है,दीवाल पर मूर्ति आदि केवल रेखायें हैं,क्योंकि पिशाचधर्म में झूठ बकना पुण्य है । पिशाचधर्म में ब्रह्मचर्य पाप है,72 हूरों की प्राप्ति जन्नत का सातवाँ आसमान है । सनातन में चार आश्रम हैं,पिशाचों में केवल एक — गृहस्त । गृह में अस्त । काम में अस्त । असत् में अस्त ।

अभी नन्दी की प्रसन्नता में सम्मिलित होने का समय है । अपने−अपने स्थान पर शिवजी की आराधना करें । विपरीत कालचक्र आरम्भ हुआ । विश्वेश्वर के जागरण का काल है । विपरीत कालचक्र 35 गुणा तीव्र होता है,अवसर्पिणी के 42000 वर्षों की तुलना में उत्सर्पिणी केवल 1200 वर्षों की होती है । 1192 ई⋅ में काशी पर म्लेच्छों का आधिपत्य हुआ था,2000 ई⋅ में अवसर्पिणी के अन्त होने से 808 वर्ष पहले । उसे 35 से भाग दें । 2000 ई⋅ से 23 वर्ष के उपरान्त काशी की मुक्ति आरम्भ होगी । विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका पर मैकॉले की प्रेतछाया से मुक्ति आरम्भ होगी ।