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Showing posts from November, 2018

मेरा पुस्तैनी मकान और रिश्तेदार

हमारे पास एक बहुत बडा पुस्तैनी मकान था, जो 60-70 साल पुराना था| जिसकी बाहर और अंदर की दीवालें और छत पूरी तरह से चरमरा गयी थी| दीवालों में कई जगह चिराड और दरारें पडने के कारण बहुत सारे सांप, बिच्छू, चूहे,कबूतर और भी साधारण तथा विशैले जानवरों ने घर बना लिया था| चूहे,बिच्छू,सांप, कबूतर और दूसरे प्राणी एक दूसरे के प्राणों के हरपल भूखे रहते| हमने रिश्तेदारों और कभीकभार छुट्टियां मनाने वाले परिवार के सदस्यों के लिए एकाद कमरा थोडी बहुत मरम्मत कराकर वातानुकुलित करा रखा था| हर साल बैठक और आगे की दिवाल को सुन्दर रंगों से सजा देते और लोग हमेशा घर की खुबसुरती की खूब सारी प्रशंसा करते| मेरे कुछ रिश्तेदार कभी कभार विदेशों और अन्य बडे शहरों से आते जाते रहते| दिनभर बैठक का आन्नद उठाते और कभी कभी पंछियों और प्राकृतिक सौंदर्यता की प्रशंशा भी करते पर रात रुकने की हिम्मत कभी नहीं करते| कमजोर दिवालों के चलते कई बार चोरों ने सेंध लगाकर घर में हाथ साफ कर लिया था| चहरदिवारी नीची होने के कारण घर में काम करने वाले लोग घर की महंगी वस्तुओं को बाहर नकली हुबहु दिखने वाली वस्तुओं से बदल देते| पडोसी मेरे घ...