Skip to main content

उधार के समोसे

एक रिश्ता, जिसे समय और पद भी नहीं बदल सके

बहुत समय पहले की बात है। एक जिले में नए जिलाधिकारी की नियुक्ति हुई। वे साधारण परिवार से निकलकर अपनी मेहनत और लगन के बल पर इस ऊँचे पद तक पहुँचे थे। उन्हें गरीबों का दर्द अच्छी तरह समझ आता था। नियुक्ति के पहले ही दिन वे शहर का निरीक्षण करने निकल पड़े। उनका काफिला विश्वविद्यालय मार्ग से गुजर रहा था। सड़क के किनारे छोटी-छोटी दुकानें,  चाय की गुमटियाँ और ठेले लगे रहते थे। जिलाधिकारी के आने की सूचना मिलते ही पुलिस ने दुकानदारों और रिक्शा चालकों को हटाना शुरू कर दिया। कोई अपनी टोकरी समेट रहा था,  तो कोई अपना ठेला खींचकर दूसरी जगह ले जा रहा था। जिलाधिकारी गाड़ी में बैठे यह सब देख रहे थे। उनके मन में विचार आया, “जिस गरीब को दो वक्त की रोटी कमाने के लिए दिनभर धूप में खड़ा रहना पड़ता है,  उसी की रोजी-रोटी हम कुछ मिनटों के लिए छीन लेते हैं। क्या यही व्यवस्था है?” 🤠

अचानक उनकी नजर सड़क के किनारे पड़ी एक पुरानी कढ़ाई और समोसे बनाने के सामान पर पड़ी।  वे तुरंत गाड़ी से उतरे और उस ओर बढ़ गए।  एक वृद्ध दुकानदार उन्हें देखकर घबरा गया। वह हाथ जोड़कर बोला, “साहब,  मुझसे गलती हो गई। अभी अपना सामान हटा लेता हूँ। मुझे माफ कर दीजिए।” 

तभी जिलाधिकारी की आँखें नम हो गईं। उन्होंने भावुक होकर कहा, “काका!” वृद्ध चौंक गया। शहर में सभी उसे चाचा कहते थे, लेकिन इतने वर्षों बाद किसी ने उसे काका कहकर पुकारा था। जिलाधिकारी फिर बोले, “काका, मुझे पहचाना नहीं?  मैं वही लड़का हूँ,  जो वर्षों पहले गाँव से यहाँ पढ़ने आया था। जिसके पास कई बार भोजन के पैसे भी नहीं होते थे। आप ही तो थे,  जो मुझे अपने हाथों से समोसे खिलाया करते थे।” यह सुनते ही वृद्ध की आँखों से आँसू बहने लगे। उसे सब कुछ याद आने लगा। वर्षों पहले एक गरीब लड़का शहर में पढ़ने आया था। उसके सिर पर माँ का साया नहीं था और जेब में पैसे भी बहुत कम होते थे। वह अक्सर शाम को काका की छोटी-सी दुकान पर आता और समोसे खाता। पैसे न होने पर काका उससे कभी हिसाब नहीं माँगते थे।  लड़का मुस्कुराकर कहता, “काका,  आज उधार लिख लो। एक दिन बड़ा आदमी बनूँगा और आपका सारा कर्ज ब्याज सहित लौटाऊँगा।” काका हँसकर कहते, “बेटा,  मुझे पैसे नहीं चाहिए।  बस खूब पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बनना।” समय बीतता गया। लड़के ने कठिन परिश्रम किया,  पढ़ाई पूरी की और एक दिन जिलाधिकारी बन गया। लेकिन व्यस्त जीवन में भी वह अपने काका और उनके समोसों को कभी नहीं भूला। आज वर्षों बाद दोनो आमने-सामने थे। जिलाधिकारी ने काका को गले लगा लिया और कहा, “काका, आज आपका उधार चुकाने आया हूँ।” काका ने उनके सिर पर हाथ रखते हुए कहा, “बेटा,  तुम्हारी सफलता ही मेरा सबसे बड़ा धन है।  तुमने मुझे पहचान लिया,  मेरे लिए यही सबसे बड़ा उपहार है।"

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को समझाया कि गरीबों की आजीविका का सम्मान किया जाए और व्यवस्था बनाते समय उनकी समस्याओं का भी ध्यान रखा जाए। इसके बाद वे काका को अपने साथ ले गए।  उस दिन समोसों का उधार नहीं,  बल्कि वर्षों पुराना प्रेम और अपनापन चुकाया गया था।

‼️ *शिक्षा* ‼️

जीवन में कितना भी बड़ा पद क्यों न मिल जाए,  उन लोगों को कभी मत भूलिए जिन्होंने कठिन समय में आपका साथ दिया था। धन और पद से व्यक्ति बड़ा बन सकता है,  लेकिन सच्चे संस्कार, कृतज्ञता और दूसरों के प्रति सम्मान ही उसे महान बनाते हैं।
याद रखिए, किसी जरूरतमंद की छोटी-सी सहायता भी उसके जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकती है। इसलिए सामर्थ्य हो तो किसी की मदद अवश्य करें, क्योंकि आज आप किसी के लिए सहारा बनेंगे,  तो कल आपकी अच्छाई किसी और के जीवन में प्रेरणा बनकर चमकेगी।

Comments

Popular posts from this blog

SELECTED INSTITUTIONS, UNIVERSITIES & ORGANISATIONS ADDRESSED ACROSS INDIA

A PAN-INDIA JOURNEY OF LEARNING, LEADERSHIP & TRANSFORMATION Dr. Pawan Dwivedi has had the privilege of engaging with STUDENTS, EDUCATORS, PARENTS, ACADEMIC LEADERS, CORPORATE PROFESSIONALS AND YOUNG ASPIRANTS across diverse educational and professional platforms throughout India. His interactions span some of the country's leading SCHOOLS, SCHOOL GROUPS, UNIVERSITIES, PROFESSIONAL ASSOCIATIONS, INDUSTRY BODIES AND CORPORATE ORGANISATIONS. PROMINENT SCHOOLS & SCHOOL GROUPS ADDRESSED:  UTTAR PRADESH GD GOENKA INTERNATIONAL SCHOOL, Gorakhpur NAVAL'S GROUP OF SCHOOLS, Gorakhpur ARMY PUBLIC SCHOOL, Gorakhpur BAMBANI INTERNATIONAL SCHOOL, Gorakhpur DELHI PUBLIC SCHOOL, Varanasi SETH M.R. JAIPURIA SCHOOLS, Varanasi SETH ANANDRAM JAIPURIA SCHOOL, Varanasi SETH M.R. JAIPURIA – BABATPUR CAMPUS, Varanasi SETH M.R. JAIPURIA – PARAO CAMPUS, Varanasi GURU NANAK ENGLISH SCHOOL, Varanasi DELHI PUBLIC SCHOOL, Kashi ARYAN INTERNATIONAL SCHOOL, Varanasi CR...

Listening skills is the key to Effective Communication

Law 9 of The 48 Laws of Power: Win Through Your Actions, Never Through Argument A popular anecdote about Michelangelo’s masterpiece, David, offers a powerful lesson in listening. When the Duke suggested changes to the statue’s nose, Michelangelo reportedly listened patiently. Instead of arguing, he pretended to make a few adjustments, letting marble dust fall. The Duke felt satisfied, while Michelangelo preserved his artistic vision. The Moral: The Art of Listening Great listeners do not react to every opinion with an argument. They listen to understand, respect the other person’s perspective, and respond with wisdom. Listening is a sign of strength, not weakness. You can respect an opinion without accepting it. Not every disagreement deserves an argument. Sometimes, silence and thoughtful action are more powerful than words. Remember: The best communicators make others feel heard without losing sight of their own purpose. #ListeningSkills #Leadership #Communication #Emotio...

This is not a School, Please suggest name in comment

एक अनूठा विद्यालय, जहाँ शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है! कुछ दिनों पूर्व मुझे एक ऐसे विद्यालय का भ्रमण करने का अवसर मिला, जिसने शिक्षा की प्रचलित अवधारणाओं से बिल्कुल अलग एक अनूठा प्रयोग प्रस्तुत किया। इस विद्यालय की सबसे रोचक विशेषता यह है कि यहाँ छात्रावास तो है, लेकिन विद्यालय के लिए कोई स्थायी भवन नहीं है। विद्यार्थी प्रतिदिन सुबह आते हैं, अपने-अपने टेंट लगाते हैं, बैठने की व्यवस्था करते हैं और फिर दिनभर की शैक्षणिक गतिविधियों में जुट जाते हैं। विद्यालय का पूरा परिसर आम, अमरूद और अन्य फलदार वृक्षों से समृद्ध है। यहाँ प्रकृति ही विद्यार्थियों की कक्षा है और जीवन स्वयं उनकी पाठ्यपुस्तक। यहाँ शिक्षा का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना नहीं, बल्कि जीवन जीना सीखना है। विद्यार्थी और शिक्षक मिलकर अगले सप्ताह की समय-सारणी (Time-Table) तैयार करते हैं। इससे विद्यार्थियों में सहभागिता, निर्णय लेने की क्षमता, समय प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व जैसे गुण विकसित होते हैं। विद्यालय परिसर में ट्रैक्टर से लेकर साइकिल तक विभिन्न प्रकार के वाहन उपलब्ध हैं। AC, पंखे, रेडियो और मोबाइल जैसे उपकरणों की मरम्मत...