हिंदी के शुद्ध उच्चारण और क्लिष्ट हिंदी बोलने वाले सुसंस्कृत ब्राह्मण परिवार में मिश्रजी का जन्म हुआ।
मिश्रजी ने PhD डिग्री प्राप्त की हिंदी में। उनकी पहली पत्नी से एक और दूसरी से भी एक पुत्र का जन्म हुआ।
दूसरी पत्नी भी स्नातकोत्तर तक हिंदी की विद्यार्थिनी रहीं। दोनों पुत्रों ने भी हिंदी में PhD डिग्री प्राप्त किए। पिता भी सरकारी महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुए, और दोनों पुत्र सरकारी और अर्धसरकारी विद्यालय /विश्वविद्यालय में पूर्णकालीन प्रोफेसर के स्थान पर कार्यरत हैं।
लगभग 64 वर्ष की उम्र में चलते फिरते मिस्रजी का स्वर्गवास हो गया। दोनों पुत्र पास ही थे, साथ ही रहते थे।
*अब दोनों में होड़ लगी कि पिता को मुखाग्नि कौन देगा*?
अग्रज भाईश्री यह सौभाग्य अनुज भाई को देना चाहते थे और अनुज अग्रज को। स्थिति यहाँ तक पहुंच गई कि मुखाग्नि कौन देगा निश्चित नहीं हो पा रहा था।
इसी बीच मिश्रजी का छोटा पुत्र परिवार संग पास ही स्थित एक बहुत ही ऐतिहासिक स्थल के दर्शन हेतु निकल गए, मिश्रजी के पार्थिव शरीर को श्मशान में अंतिम क्रिया के बारातियों के साथ छोड़कर।
अनेकों प्रयत्न के बाद इन दोनों में से एक पुत्र पिता को मुखाग्नि देने को तैयार हुए।
बाद में जब टटोलने के बाद पता चला, दोनों ही पुत्र अपने नौकरी की व्यस्तता के कारण अंतिम विधि के बाद की 13 दिन और उसके बाद के नीति नियमों से भागना चाहते थे।
अब दोनों भाई साथ बैठकर मिश्रजी द्वारा अर्जित संपत्तियों का आपस में आपसी सहमति से विभाजन कर रहे हैं, इसमें किसी के मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं पड़ रही।
मिश्रजी की दिवंगत आत्मा को प्रणाम।
Comments
Post a Comment