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15th August (Independence Day) Anchoring

स्वतंत्रता दिवस/15 अगस्त के लिए स्कूल एंकरिंग स्क्रिप्ट | School Anchoring Script for Independence Day/15 August है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं अक्सर दुनियाँ के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है जो रक्त कणों से लिखी गई,जिसकी जयहिन्द निशानी है प्रस्तावना – सुप्रभात! आदरणीय मुख्य अतिथि, सम्मानित शिक्षकगण, प्रिय अभिभावक और प्यारे विद्यार्थियों! आज हम सभी यहाँ स्वतंत्रता दिवस की 77वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। यह दिन हम सभी के लिए गर्व का प्रतीक है, क्योंकि आज ही के दिन हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें आजादी दिलाई थी। मैं [आपका नाम], आप सभी का इस विशेष कार्यक्रम में हार्दिक स्वागत करता/करती हूँ। जो भरा नहीं है भावों से, जिसमें बहती रसधार नहीं, वह हृदय नहीं पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। अपनी भारत माता के प्रति भक्ति का भाव, श्रद्धा का भाव, स्नेह का भाव होना ही चाहिये। अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण से करना भी देश भक्ति है, देश की सेवा है। राष्ट्रीय ध्वज फहराना – अब समय आ गया है हमारे राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानित करने का। मैं [प्रमुख अतिथि का नाम] से सादर अनुरोध करता/करती हूँ कि वे मंच पर आकर हमारे तिरंगे को फहराकर इस समारोह का शुभारंभ करें। सभी लोग सावधान होकर खड़े हो जाएं और दिल से हमारे राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें। तिरंगे के सम्मान में हम सभी मिलकर सलामी देंगे। विश्वगुरु का सपना पूरा, हर दिल पे हमारी जीत हो। राष्ट्रभक्ति की अलख जगा दो, हर दिल हर इंसान में।। घर-घर में फहरा दो तिरंगा, भारत माँ की शान में।। अम्बर भर के प्यार दिलों में खुशियों का अंबार है। राष्ट्रगान – तिरंगे के फहराने के पश्चात, हम सब मिलकर एक सुर में हमारे राष्ट्रगान “जन गण मन” का गायन करेंगे। आइए, अपनी आवाज़ से देशभक्ति की भावना को प्रकट करें और इस पावन धरती को नमन करें। स्वागत भाषण – अब मैं [अतिथि का नाम] से अनुरोध करता/करती हूँ कि वे मंच पर आएं और इस अवसर पर हमें अपने प्रेरणादायक शब्दों से मार्गदर्शन करें। उनकी बातों से हमें न सिर्फ आजादी की महत्वता का एहसास होगा, बल्कि हम अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझेंगे। पंद्रह अगस्त का दिन कहता:आज़ादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है,रावी की शपथ न पूरी है॥ जिनकी लाशों पर पग धर कर,आज़ादी भारत में आई, वे अब तक हैं खानाबदोश, ग़म की काली बदली छाई॥ कलकत्ते के फुटपाथों पर, जो आँधी-पानी सहते हैं। उनसे पूछो, पंद्रह अगस्त के, बारे में क्या कहते हैं॥ हिंदू के नाते उनका दु:ख, सुनते यदि तुम्हें लाज आती। तो सीमा के उस पार चलो, सभ्यता जहाँ कुचली जाती॥ इंसान जहाँ बेचा जाता, ईमान ख़रीदा जाता है। इस्लाम सिसकियाँ भरता है, डालर मन में मुस्काता है॥ भूखों को गोली नंगों को, हथियार पिन्हाए जाते हैं। सूखे कंठों से जेहादी, नारे लगवाए जाते हैं॥ लाहौर, कराची, ढाका पर, मातम की है काली छाया। पख्तूनों पर, गिलगित पर है, ग़मगीन गुलामी का साया॥ बस इसीलिए तो कहता हूँ, आज़ादी अभी अधूरी है। कैसे उल्लास मनाऊँ मैं? थोड़े दिन की मजबूरी है॥ दिन दूर नहीं खंडित भारत को, पुन: अखंड बनाएँगे। गिलगित से गारो पर्वत तक, आज़ादी पर्व मनाएँगे॥ उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से, कमर कसें बलिदान करें। जो पाया उसमें खो न जाएँ, जो खोया उसका ध्यान करें॥ सांस्कृतिक कार्यक्रम – प्रिय मित्रों, अब समय है हमारे विद्यार्थियों की अद्भुत प्रस्तुतियों का। वे अपने नृत्य, गीत, और कविताओं के माध्यम से हमें भारतीय संस्कृति की विविधता और हमारे महान देश की धरोहर से रूबरू कराएंगे। दोनों होस्ट: आप सभी का आज के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद। सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! सभी: जय हिंद! ________________________________________ [नोट: इस स्क्रिप्ट के अंत में सभी एक साथ खड़े होकर तिरंगे को सलामी देंगे और राष्ट्रगान गाएंगे।]

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