रमेश ने अपने बच्चे से पूछा कि आखिरकार तुम्हें करना क्या है?
पियूष (रमेश का बेटा) बोला पिताजी मुझे एक साल का ड्राप लेना है |
रमेश सबके बच्चे १२वी के बाद अलग अलग यूनिवर्सिटीज में दाखिला लेकर पढाई करने की तैयारी कर रहे हैं और तुम्हेँ ड्राप लेना है | कहीं दिमाग खराब तो नहीं हो गया है तुम्हारा ?
पियूष ने बड़ी विनम्रता से अपने पिताजी का हाथ अपने हाथ लेकर आँखें नीची रखकर बोला ,पिताजी मै एक AVERAGE स्टूडेंट रहा हूँ, और मुझे कोई बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी या कोर्स में एडमिशन नहीं मिलने वाला पिताजी , और जहाँ मिल रहा है, वहाँ अगले साल भी मिलेगा ही |
रमेश ने प्यार दिखाते हुए पियूष से पूछा, तो फिर एक साल बिगाड़ने से अच्छा है, इसी साल ADMISSION क्यूँ ना ले लें?
पियूष ने धीरे से समझाते हुए कहा: पिताजी पढाई करने के बाद एक या दो साल JOB MARKET में भटकने से अच्छा है मैं अभी ६ महीने अलग अलग कोर्सेज के बारे में जानुं और एक सही कोर्स ढूंढकर उसमें ADMISSION अगले साल लूँ |
इन ६ महीनो में मैं थोड़ा बहुत READING HABIT बढ़ाऊंगा और अपनी पसंद, अपनी क्षमता को समझने की कोशिश करूँगा, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं आपको निराश नहीं करूँगा|
अगले वर्ष पियूष ने एडमिशन लेने से पहले १२ जितनी अलग अलग NATIONAL व INTERNATIONAL AUTHORS की किताबें पढ़ीं, उसके CLASSMATES जिन्होंने विभिन्न UNIVERSITY में एडमिशन लिया था, उन सबसे मिलकर विभिन्न SPECIALISATIONS के बारे में जाना, और अगले साल उसने अपने मनपसंद कोर्स में एडमिशन लिया |
पियूष (रमेश का बेटा) बोला पिताजी मुझे एक साल का ड्राप लेना है |
रमेश सबके बच्चे १२वी के बाद अलग अलग यूनिवर्सिटीज में दाखिला लेकर पढाई करने की तैयारी कर रहे हैं और तुम्हेँ ड्राप लेना है | कहीं दिमाग खराब तो नहीं हो गया है तुम्हारा ?
पियूष ने बड़ी विनम्रता से अपने पिताजी का हाथ अपने हाथ लेकर आँखें नीची रखकर बोला ,पिताजी मै एक AVERAGE स्टूडेंट रहा हूँ, और मुझे कोई बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी या कोर्स में एडमिशन नहीं मिलने वाला पिताजी , और जहाँ मिल रहा है, वहाँ अगले साल भी मिलेगा ही |
रमेश ने प्यार दिखाते हुए पियूष से पूछा, तो फिर एक साल बिगाड़ने से अच्छा है, इसी साल ADMISSION क्यूँ ना ले लें?
पियूष ने धीरे से समझाते हुए कहा: पिताजी पढाई करने के बाद एक या दो साल JOB MARKET में भटकने से अच्छा है मैं अभी ६ महीने अलग अलग कोर्सेज के बारे में जानुं और एक सही कोर्स ढूंढकर उसमें ADMISSION अगले साल लूँ |
इन ६ महीनो में मैं थोड़ा बहुत READING HABIT बढ़ाऊंगा और अपनी पसंद, अपनी क्षमता को समझने की कोशिश करूँगा, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं आपको निराश नहीं करूँगा|
अगले वर्ष पियूष ने एडमिशन लेने से पहले १२ जितनी अलग अलग NATIONAL व INTERNATIONAL AUTHORS की किताबें पढ़ीं, उसके CLASSMATES जिन्होंने विभिन्न UNIVERSITY में एडमिशन लिया था, उन सबसे मिलकर विभिन्न SPECIALISATIONS के बारे में जाना, और अगले साल उसने अपने मनपसंद कोर्स में एडमिशन लिया |
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